यमुना रिवरफ्रंट से लेकर स्मार्ट सिटी तक, महिलाओं के बिना अधूरी है दिल्ली के विकास की तस्वीर: प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, कैबिनेट मंत्री, दिल्ली एनसीटी सरकार

संवहनात्मक अवसंरचना प्रबंधन का समय आ गया है: डी थारा, आईएएस, अतिरिक्त सचिव, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय

नई दिल्ली, 27 जून, 2025: भारतीय अवसंरचना क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन को देखते हुए, दिल्ली एनसीटी सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने चौथे नारेडको माही कन्वेंशन में कहा कि “देश में स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए सुंदरता अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

कन्वेंशन में श्रीमती डी थारा, आईएएस, अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा कि केवल इमारतें और हाउसिंग कॉम्प्लेक्स विकसित करने के बजाय अब हमें एकीकृत अवसंरचना प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए ताकि टिकाऊ आवासीय वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।

वर्ष 2025 के इस वार्षिक कन्वेंशन की थीम थी ‘राइज़ एंड बिल्ड: वुमन ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट फॉर ए सस्टेनेबल टुमॉरो’। माही की स्थापना 2021 में नारेडको (नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल) द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना और रियल एस्टेट व संबंधित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

मंत्री ने कहा, “मैं यह देखना चाहता हूं कि हम मिलकर दिल्ली के लिए क्या कर सकते हैं। दिल्ली सरकार यमुना रिवरफ्रंट को विकसित करने पर भी काम कर रही है, तो हम इस परियोजना में और क्या योगदान दे सकते हैं। सुंदर शहर स्मार्ट सिटी का मुख्य अंग होंगे और मुझे लगता है कि महिलाएं और नारेडको माही इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”

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प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, कैबिनेट मंत्री

एक फायरसाइड चैट में बोलते हुए अतिरिक्त सचिव श्रीमती डी थारा ने कहा कि रियल एस्टेट विकास में टिकाऊ उपायों की आवश्यकता है और इसमें महिलाओं की अहम भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा, “हमें केवल हाउसिंग से आगे बढ़कर जल आपूर्ति और हरित क्षेत्र जैसे संबंधित क्षेत्रों पर भी ध्यान देना होगा। अब समय आ गया है कि हम रियल एस्टेट से आगे बढ़कर एकीकृत अवसंरचना प्रबंधन की ओर कदम बढ़ाएं।” बाढ़ के प्रभाव को कम करने के उपाय के रूप में उन्होंने सुझाव दिया कि डेवलपर्स को हरित क्षेत्रों के साथ-साथ ‘ग्रीन टैंक’ भी विकसित करने चाहिए जो अतिरिक्त जल को संग्रहित करने में मदद करेंगे और जल संरक्षण में भी सहायक होंगे। अतिरिक्त सचिव ने यह भी सुझाव दिया कि डेवलपर्स को आवासीय परिसरों में अपनाए गए हरित उपायों और जल उपलब्धता के दस्तावेज़ खरीदारों को सौंपने चाहिए जिससे जागरूकता और स्थिरता बढ़े और उत्तरदायित्व तय हो।

नारेडको माही के विस्तार और रियल एस्टेट क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करते हुए, माही की अध्यक्ष श्रीमती स्मिता पाटिल ने कहा, “भारत के आवासीय भविष्य को नीति से बनाना होगा, उद्योग से आकार देना होगा, और समावेशी मूल्यों – विशेष रूप से महिलाओं और उभरते नेताओं को सशक्त बनाने – से मार्गदर्शन लेना होगा। हमारी पहल ‘शाश्वत निर्माण’ के तहत हम सतत रियल एस्टेट विकास पर केंद्रित हैं। यह पर्यावरण अनुकूल निर्माण पद्धतियों, ऊर्जा दक्षता और हरित भवन सिद्धांतों को रियल एस्टेट क्षेत्र में समाहित करने का लक्ष्य रखती है। हम एक सेतु की तरह काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं — क्षेत्र में महिलाओं का समर्थन करने, युवा प्रतिभाओं को पोषित करने और सरकार के साथ मिलकर एक मजबूत शहरी भारत के निर्माण में सहयोग देने हेतु।”

रियल एस्टेट क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पर बल देते हुए, नारेडको के चेयरमैन डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने फायरसाइड चैट में कहा कि “स्किलिंग” ही महिला नेतृत्व वाले रियल एस्टेट क्षेत्र का आधार बनेगा। उन्होंने कहा, “रियल एस्टेट भारत का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। हालांकि, इसमें कुशल श्रमिकों की कमी है, जिसे यदि कुशल महिलाओं से पूरा किया जाए तो न केवल रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण संभव होगा, बल्कि यह आर्थिक वृद्धि को भी बल देगा और अर्थव्यवस्था के आकार को तीन गुना करने की दृष्टि को प्राप्त करने में सहायता करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत में होम लोन की एनपीए दर विश्व में सबसे कम है और इसका श्रेय घरेलू अर्थव्यवस्था में महिलाओं की कुशलता को जाता है। “इसमें महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है,” उन्होंने कहा।

महिला सशक्तिकरण और निर्णायक पदों पर महिलाओं की भागीदारी को लेकर नारेडको के अध्यक्ष श्री हरि बाबू ने कहा कि अपार संभावनाएं मौजूद हैं जिन्हें महिलाएं भुना सकती हैं। उन्होंने कहा, “इसे पकड़ो, अगर आप नहीं पकड़ोगे तो कोई और नहीं देगा,” उन्होंने भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए कहा।

इस आयोजन में वुमन ऑफ सबसटांस, जर्नी एकम्प्लिशमेंट्स, रेरा:सफलता एवं चुनौती और भारतीय रियल एस्टेट: 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बाजार की ओर’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश भर से नीति निर्धारकों और प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

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